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नियमों की अनदेखी से 13 हज़ार करोड़ का नुकसान, 28% औद्योगिक परियोजनाएं अधूरी, CAG रिपोर्ट का खुलासा

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की 2023 की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि नियमों को ताक पर रखकर किए गए भूखंड आवंटन
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औद्योगिक विकास के लिए बनी ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगा है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की 2023 की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि नियमों को ताक पर रखकर किए गए भूखंड आवंटन और अनुबंध शर्तों की अनदेखी से सरकार को करीब 13,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

अधूरी पड़ी औद्योगिक परियोजनाएं

रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में 28% औद्योगिक परियोजनाएं अभी तक पूरी नहीं हो पाई हैं। वहीं, 48% परियोजनाओं में आवंटन के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। कई मामलों में भूखंड वर्षों तक खाली पड़े रहे, जबकि आवंटन की शर्तें स्पष्ट रूप से समयबद्ध निर्माण की मांग करती हैं।

1991 से 2021 तक, उद्योग नहीं फिर भी प्लॉट कब्जे में

1991 से 2021 के बीच प्राधिकरणों ने 2580 औद्योगिक भूखंड आवंटित किए, लेकिन इनमें से 1341 आवंटियों (52%) ने समयसीमा में तो उद्योग लगाया और ही निर्माण कार्य पूरा किया। इसके बावजूद प्राधिकरण ने आवंटन निरस्त नहीं किया, जिससे करीब 630 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

रियल एस्टेट कंपनियों को खेल सुविधाएं सौंपने का मामला

CAG रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने निजी रियल एस्टेट कंपनियों को खेल सुविधाओं के विकास का काम सौंप दिया। केवल यह कार्य अनुबंध शर्तों के विपरीत था, बल्कि इस कारण सरकारी खजाने को भारी चूना लगा। उदाहरण के तौर पर, 2011 और 2014 में खेले गए अनुबंधों के तहत खेल सुविधाओं का विकास नहीं हुआ, जबकि प्लॉट का उपयोग व्यावसायिक रूप से कर लिया गया। जो भूखंड कैंसिल भी किये गये उन पर भी आजतक बिल्डर का ही क़ब्ज़ा है 

आवंटियों को अनुचित लाभ

रिपोर्ट के मुताबिक ग़लत तरीक़े से भूखंड आवंटित किए थे, अनुमति के बिना उपयोग बदले गए, स्पोर्ट्स सिटी परियोजना 1 के लिए अनुमति तक नहीं ली।

37.40 करोड़ों का नुक़सान केवल कंपनी में निदेशक के बदलाव होने में लगने वाली फ़ीस लेने से हुआ, साथ ही अतिरिक्त FAR भी आवंटियों को दिया गया जिससे कंपनियों को क़रीब 470 करोड़ का सीधा हुआ, जबकि सरकारी राजस्व का नुक़सान हुआ।

CAG की चेतावनी

CAG ने अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि यदि औद्योगिक भूखंडों का दुरुपयोग और अनुबंध शर्तों का उल्लंघन जारी रहा, तो प्रदेश में औद्योगिक निवेश की साख पर बुरा असर पड़ेगा और सरकार के राजस्व को लगातार नुकसान होता रहेगा।

ग्रेटर नोएडा जैसे क्षेत्र औद्योगिक विकास की पहचान हैं, लेकिन CAG रिपोर्ट यह बताती है कि पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी ने केवल निवेशकों का भरोसा तोड़ा है, बल्कि जनता के टैक्स के हज़ारों करोड़ रुपये डुबो दिए हैं।

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